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दिशा सन्धान–5, जनवरी-मार्च 2018

दिशा सन्धान–5, जनवरी-मार्च 2018

दिशा सन्‍धान-5 की पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। अलग-अलग लेखों को यूनिकोड फॉर्मेट में आप नीचे दिये गये लिंक्स से पढ़ सकते हैं। 

 

सम्‍पादकीय

गुजरात व हिमाचल के चुनाव और फ़ासीवाद के प्रतिरोध की रणनीति का प्रश्न

भारतीय कम्‍युनिस्‍ट आन्‍दोलन का इतिहास, समस्‍याएं व चुनौतियां

नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती दशक : एक सिंहावलोकन (चौथी किस्त) : दीपायन बोस
विज्ञान और मार्क्सवादी दर्शन के सम्बन्धों का एक अवैज्ञानिक और अज्ञानतापूर्ण पाठ : एक आलोचना : सनी सिंह

विश्‍व कम्‍युनिस्‍ट आन्‍दोलन का इतिहास, समस्‍याएं व चुनौतियां

सोवियत समाजवादी प्रयोगों के अनुभव : इतिहास और सिद्धान्त की समस्याएँ (पाँचवीं किस्त) : अभिनव सिन्‍हा
उत्तर-मार्क्सवाद के ‘कम्युनिज़्म’ : उग्रपरिवर्तन के नाम पर परिवर्तन की हर परियोजना को तिलांजलि देने की सैद्धान्तिकी : शिवानी, बेबी

फासीवाद / दक्षिणपंथ

राजसमन्द हत्याकाण्ड और भारतीय फ़ासीवाद का चरित्र : शिवानी कौल

साम्राज्‍यवाद

चीन : एक उभरती हुई साम्राज्यवादी ताक़त और उसके निहितार्थ : आनन्‍द सिंह
ट्रम्प का यरुशलम दाँव – अमेरिकी साम्राज्यवाद की बौखलाहट की निशानी : आनन्‍द सिंह

अर्थजगत

बिटकॉइन : पूँजीवादी संकट के भँवर में एक नया बुलबुला : उत्‍कर्ष

रिपोर्ट

आज के साम्राज्यवाद पर लखनऊ में आयोजित छठी अरविन्द स्मृति संगोष्ठी की रिपोर्ट : आनन्‍द सिंह

आपकी बात

पाठकों के पत्र : दिशा सन्धान – 5, जनवरी-मार्च 2018

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दिशा सन्धान–4, जनवरी-मार्च 2017

  • ‘रुग्ण लक्षणों’ का यह समय और हमारे कार्यभार
  • सोवियत संघ में समाजवादी प्रयोगों के अनुभव : इतिहास और सिद्धान्त की समस्याएँ (चौथी किस्त)
  • नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती दशक : एक सिंहावलोकन (तीसरी किस्त)
  • माकपा के भीतर फ़ासीवाद पर बहस – चुनावी जोड़-जुगाड़ के लिए सामाजिक जनवाद की बेशर्म क़वायद
  • फ़ि‍लीपींस में दुतेर्ते परिघटना और उसके निहितार्थ
  • मराठा मूक मोर्चों के पीछे मौजूद सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक गतिकी : एक मूल्यांकन
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    दिशा सन्धान-3, अक्टूबर-दिसम्बर 2015

  • सोवियत संघ में समाजवादी प्रयोगों के अनुभवः इतिहास और सिद्धान्त की समस्याएँ (तीसरी किस्त)
  • नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती दशकः एक सिंहावलोकन (दूसरी किस्त)
  • ‘वामपन्थी आन्दोलन के समक्ष कुछ विचारणीय प्रश्न’
  • उन समझदारों के लिए सबक जो हमेशा हाशिये पर पड़े रहना चाहते हैं
  • भावुकतावादी क्रान्तिवाद बनाम मार्क्सवादी-लेनिनवादी अप्रोच एवं पद्धति
  • इस्लामिक स्टेट का उभार और मध्य-पूर्व में साम्राज्यवादी हस्तक्षेप का नया दौर
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    दिशा सन्धान-2, जुलाई-सितम्बर 2013

  • भारत में पूँजीवादी कृषि का विकास और मौजूदा अर्द्ध-सामन्ती सैद्धान्तिकीकरण की भ्रान्ति के बौद्धिक मूल
  • सोवियत संघ में समाजवादी प्रयोगों के अनुभवः इतिहास और सिद्धान्त की समस्याएँ (दूसरी किस्त)
  • नेपाली क्रान्तिः गतिरोध और विचलन के बाद विपर्यय और विघटन के दौर में
  • ‘कम्युनिज़्म’ का विचार या उग्रपरिवर्तनवाद के नाम पर परिवर्तन की हर परियोजना को तिलांजलि देने की सैद्धान्तिकी
  • जाति प्रश्न और उसका समाधान: एक मार्क्सवादी दृष्टिकोण
  • आम आदमी पार्टी की राजनीति के उभार के निहितार्थ
  • फ़ासीवाद की बुनियादी समझ नुक्तेवार कुछ बातें
  • नमो फासीवाद : नवउदारवादी पूँजीवाद की राजनीति और असाध्य संकटग्रस्त पूँजीवादी समाज में उभरा धुरप्रतिक्रियावादी सामाजिक आन्दोलन
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    दिशा सन्धान-1, अप्रैल-जून 2013

  • ‘दिशा सन्धान’ क्यों?
  • सोवियत संघ में समाजवादी प्रयोगों के अनुभवः इतिहास और सिद्धान्त की समस्याएँ (पहली किस्त)
  • नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती चार दशक: एक सिंहावलोकन (पहली किस्त)
  • भारत में नवउदारवाद के दो दशक
  • आधुनिक यूनानी त्रासदी के त्रासद नायक के विरोधाभास
  • स्लावोय ज़िज़ेक की पुस्तक ‘दि इयर ऑफ ड्रीमिंग डेंजरसली’ की आलोचना
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