आपातकाल के कुछ अनुत्तरित यक्ष-प्रश्न और हमारा समय
कट्टरपंथी हिन्दुत्व की फासीवादी लहर पर सवार होकर सत्ता तक पहुंचने वाली भाजपा ने भी आपातकाल को याद करते हुए यह घोषणा की कि वह तत्कालीन कांग्रेसी सरकार के अत्याचारों का सिलसिलेवार पर्दाफाश करेगी। रंग पोतकर शहीद बनने वाले संघियों को यह याद दिलाया जाना चाहिए कि उनमें से कितने लोग आपातकाल के दौरान माफीनामा लिखकर जेलों से बाहर आये थे और किस तरह तत्कालीन सरसंघचालक बाला साहब देवरस ने जेल से रिहाई और आर.एस.एस. से प्रतिबंध हटाने की शर्त पर बीस-सूत्री कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए श्रीमती गांधी को संदेश भिजवाया था। और यह भी कि आपातकाल के कई चर्चित चेहरे, जैसे कि मेनका गांधी, ममता बनर्जी, जगमोहन आदि आज सत्ता में भाजपा के पार्टनर हैं। वैसे यह सवाल तो जार्ज फर्नाण्डीस से भी पूछा जा सकता है और एक दूसरे स्तर पर वी.पी. सिंह से भी। आज वी.पी. सिंह दिल्ली के झुग्गी-झोंपड़ी वासियों के मसीहा बने फिर रहे हैं, पर इसी जगमोहन की रहनुमाई में आपातकाल के दौरान जब जामा मस्जिद क्षेत्र के गरीबों पर बुलडोजर चला था, तब वे एक निहायत वफादार कांग्रेसी थे और आपरेशन ब्लू स्टार के समय भी वे कांग्रेस में ही थे। बहरहाल, यह चर्चा बेमानी है क्योंकि बुर्जुआ राजनीति का कोई भी पैंतरापलट या कायाकल्प आज किसी को चौंकाता नहीं।
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