मदर टेरेसा और उनके उत्तराधिकारियों का ‘‘मिशन’’: सेवा का सच!
यदि कोई संस्था सिर्फ अपने धंधे को चलाते रहने के लिए गरीबी जैसी अमानवीय दुरवस्था के बने रहने की कामना करती है तो उसके कार्य-कलापों को निःस्वार्थ सेवा भला कैसे कहा जा सकता है? वास्तव में दया-करुणा से पूरित हृदय वाला कोई व्यक्ति क्या यह सोच सकता है कि दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा भोजन, कपड़ों, दवा-इलाज की सुविधाओं से सिर्फ इसलिए वंचित बना रहे कि सेवा का उसका धंधा चलता रहे और वह बेरोजगार न हो। read more











